छोटा मुंह छोटी बात : अक्खा लाइफ़ लेमिनेटेड


nainitalsamachar
April 9, 2019

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रमदा

दर्पण / आईना / शीशा बड़े काम की चीज़ है. हम जैसे हैं वैसा ही बिम्ब दिखा कर वह हमें हमीं से मिलाता है. उसके सामने हम ठीक वैसे ही दिखाई देते हैं जैसे हम हैं. दर्पण में अपना चेहरा मात्र देख कर जाना जा सकता है कि हम स्वस्थ/अस्वस्थ, सबल/दुर्बल, सुन्दर/असुन्दर, दागी/बेदाग़ कैसे हैं.

स्कूली दिनों में इसी दर्पण को लेकर गुरूजी लोग बहुत कष्ट देते थे. दर्पण के साथ साहित्य का जोड़ लगा कर कहते थे “साहित्य समाज का दर्पण है” विषय पर निबंध लिख कर दिखाओ. यहां-वहां से टीप-टाप कर हम कुछ तो उनकी नज़र कर ही देते थे. बाद के सालों में पता लगा केवल साहित्य ही नहीं है समाज का दर्पण… फ़िल्में, टी.वी.-सीरियल, मीडिया सभी समाज का ही दर्पण हैं. टेलीविजन के रंगीन हो जाने के बाद से टेलीविजन के विज्ञापनों में भी समाज और अपने आसपास की झलक दिखाई देती है, यानि विज्ञापन भी हमें आईना दिखा सकते हैं.

पता नहीं आपका ध्यान गया या नहीं इधर टी.वी. पर एक विज्ञापन बहुत दिखाई दे रहा है जिसकी आधार पंक्ति है..” अपुन का अक्खा लाइफ़ लेमिनेटेड ”. विस्तार से बताऊँ ? एशियन पेंट्स के इस विज्ञापन के शुरूआती दृश्य में परदे पर अभिनेता रनबीर कपूर, जो एक छुटभैये नेता की भूमिका में हैं, पारदर्शी प्लास्टिक शीट से ढके एक शानदार, किन्तु छोटे से, मकान
के एक नमूने पर अपने चाय के प्याले से चाय गिराते हुए बताते हैं “अपुन का अक्खा लाइफ लेमिनेटेड”. अगले दृश्य में अभिनेता पृष्ठभूमि में है और सामने स्क्रीन पर अखबार की हैडलाइन की तरह लिखा दिखता है “Politician caught in 20000 Cr.Scam”. अब जो सीन सामने है उसमें लोग उस भवन, जो अब पहले से कहीं अधिक बड़ा और शानदार दिखाया गया है, पर कीचड़–पत्थर फेंकते दिखते हैं किन्तु अगले दृश्य में भवन उतना ही भव्य और बेदाग़ दिखाई पड़ता है क्योंकि लेमिनेशन ने उसे नुकसान नहीं पहुँचने दिया.

फिर खबर दिखती है कि पॉलिटिशियन अब मंत्री बना दिया गया है और उसी भवन के सामने, प्रसन्न मुद्रा में, उसी पारदर्शी प्लास्टिक शीट से अपने आप को लपेटते हुए गर्वोन्नत घोषणा करता है “अपुन का अक्खा लाइफ़ लेमिनेटेड” और नृत्य की सी भंगिमा में कहता है , “अभी तो और चलेगा…अभी तो और बढ़ेगा…अभी तो और दिखेगा”.

मैं जानना चाहता हूँ वह किसके और चलने, बढ़ने, दिखने की ओर इशारा कर रहा है ? मेरे नज़रिए से वह भ्रष्टाचार और बेईमानी के अभी और चलने, बढ़ने, दिखने की ही बात कर रहा है. मन ही मन मैं यह भी सोचने लगा हूँ कि मौजूदा चुनावी घमासान में जीते कोई भी किन्तु चलेगा, बढ़ेगा, दिखेगा वही क्योंकि नेताओं का तो “अक्खा लाइफ़ लेमिनेटेड”.

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