70 करोड़ नहीं है भाई, बांध विस्थापितों के पेंडिंग बिल


nainitalsamachar
March 8, 2019

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महिपाल नेगी

पेंडिंग बिल तीन-चार करोड़ से अधिक के नहीं हैं, टिहरी बांध विस्थापितों के पानी के पेंडिंग बिल सरकार द्वारा माफ किये जाने को लेकर कई तरह के भ्रम पैदा हुये हैं। ऐसा लग रहा है जैसे विस्थापितों ने 70 करोड़ का पानी पी लिया। जैसे देश का सारा पानी इन्होंने ही पी लिया। इसे मीडिया व जनप्रतिनिधियों द्वारा इस तरह से प्रचारित किया जा रहा है कि जैसे विस्थापितों का ही 70 करोड़ माफ किया गया हो। 

बताना चाहंूगा कि बहुप्रचारित इस 70 करोड़ की राशि में कुल पेंडिंग पेयजल बिल मात्र 15 करोड़ रूपये के ही हैं। इनमें भी विस्थापित परिवारों के नाम मात्र तीन से चार करोड़ रूपये के बिल होंगे। विस्थापितों के पेंडिंग बिल का अलग से कोई आंकलन अब तक विभाग ने किया ही नहीं है। अन्य दस ग्यारह करोड़ रूपये के बिल गैर विस्थापित सामान्य नागरिकों, सरकारी व अर्धसरकारी अधिकारी, कर्मचारी व विभागीय कार्यालयों, होटल आदि व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के हैं। कुछ सरकारी कार्यालयों के बिल तो लाख रूपये से भी ज्यादा के हैं। जबकि करीब आधे विस्थापित परिवारों ने लगातार नोटिस आने पर पूरे या आंशिक बिल जमा किये हैं। ये भी इसलिये पेंडिंग रहे कि गत दस वर्षों में अलग अलग प्रशासनिक आदेशों व मुख्यमंत्री की घोषणा में शहर को पेयजल शुल्क से मुक्त रखने की बात होती रही।

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नई टिहरी में 2008-09 के बाद ही पेयजल बिलिंग शुरू हुई है। इससे पहले टीएचडीसी जल निगम को योजना के रख रखाव हेतु सालाना बजट देता था। नागरिक मंच ने पूरे नई टिहरी को विस्थापित शहर के आधार पर पेलजल शुल्क से मुक्त रखने की मांग उठाई थी। ध्यान देने वाली बात यह भी है कि करीब 55 करोड़ रूपये जल संस्थान की पुनर्वास स्थलों की देनदारियां हैं। जोकि योजना की मरम्मत, विस्तार व फीटर आदि संविदा कर्मियों का वेतन आदि की मद का है। यह तो सरकार को देना ही था। जल संस्थान ने सरकार को कुल देनदारियां भेजी थी। जिसमें पेंडिंग बिल एक छोटी राशि करीब 20 प्रतिशत ही है। 

पेंडिंग राशि का भुगतान कर सरकार ने अच्छा कार्य किया है लेकिन इस सारी राशि को केवल विस्थापितों का पेंडिंग बताना सरासर गलत है। विस्थापितों के नाम पर पहले भी कई गोलमाल हुये हैं।  हालांकि अभी कैबनेट के फैसले की स्पष्ट जानकारी नहीं है। जल संस्थान को कोई आदेश आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी लेकिन 70 करोड़ की राशि में नई टिहरी के सभी पेंडिंग बिल माफ हो जाने चाहिये। चाहे ये विस्थापित हों या सामान्य नागरिक। सीएम की घोषणा तो ऐसी ही थी l 

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