श्रद्धांजलि सर्वोदयी नेता मान सिंह : इनमें समाहित था गांधी, विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण का प्रतिबिम्ब


nainitalsamachar
February 14, 2019

अल्मोड़ा। जाने—माने गांधीवादी स्तंभ मान सिंह रावत 90 वर्ष की आयु में हुए निधन पर यहां एक शोक सभा का आयोजन हुआ। जिसमें सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरा दु:ख जताया। रानीधारा में हुई शोक सभा में वक्ताओं ने कहा कि श्री रावत सर्वोदयी सेवक और भाई जी के नाम से गढ़वाल क्षेत्र में ही नहीं पूरे देश में जाने जाते थे। 1928 में जन्मे श्री रावत ने टाटा इंस्टिट्यूट आफ सोसल साईंस से 1952 में स्नातक करने के बाद भी कैरियर की नहीं सोची, जबकि उनके साथ के लोग देश के जाने—माने संस्थानों के प्रमुख बने। महात्मा गांधी, विनोबा भावे और जयप्रकाश नारायण के विचारों ने उनके जीवन पर इतना प्रभाव किया कि उन्होंने कोटद्वार को अपनी कर्मस्थली बनाकर पूरे जीवन भर प्रेम और अहिंसा ने सामाजिक चेतना को जगाने का काम किया। उन्होंने भूदान आंदोलन में भी शिरकत की और कौसानी में अनाशक्ति आश्रम से प्रेरणा लेकर इस कार्य को अपने क्षेत्र में आगे बढ़ाया। उन्होंने नेपाल, भूटान सहित भारत के अनेक राज्यों में पद यात्राएं निकली और सामाजिक अलख जगाने का काम किया। उत्तराखण्ड में महिलाओं विषेशकर बोक्सा जाति के उत्थान के लिए सदैव उन्हें याद किया जाएगा। बंधुआ मुक्ति, नषाविरेाध, बच्चों की षिक्षा, महिला अधिकारों, जलनीति बनाने, ग्रामीण क्षेत्रों में वनों को बचाने, स्वच्छता, दहेज उन्मूलन, महिला शिक्षा आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्यों, अनशन आदि के कारण अनेकों बार उन्हें पुरस्कृत भी किया गया। मंचों और प्रचार से दूर रहने वाले मान सिंह रावत को आज तक वह सम्मान नहीं मिल पाया जिसके वे हकदार थे। उनकी पत्नी श्रीमती षषि प्रभा रावत भी सरला बहन की प्रथम शिक्षकों में से एक थी। उत्तराखण्ड राज्य में जल जंगल और जमीन से वे गहराई से जुड़े थे। 2015 में जमना लाल पुरस्कार से वे सम्मानित किए जा चुके थे।

वैब पोर्टल ‘​क्रिऐटिव न्यूज एक्सप्रेस’ से साभार

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